Paush Purnima 2023 (Shakambhari Purnima): Date & Time, Significance, Vrat Katha, Vrat Vidhi

Paush Purnima 2023 falls on January 6, 2023. Paush Purnima is also known as Shakambhari Purnima. According to the scriptures, Maa Durga took the the form of Shankbhari on the day of Paush purnima in order to relieve the devotees from severe food crisis and famine on earth.

Full moon day that falls in the month of Paush is celebrated as Paush Purnima and is considered a pretty auspicious day. Taking a dip in the holy water of River Ganga and performing Satyanarayan Pooja are certain rituals related to this day.

It is said that by performing these rituals, a person can get rid of all their sins and can also achieve salvation. Sins from even the past life can be forgiven of those dipping in the holy water of any sacred river.

The day after Paush Purnima marks the day of beginning of Magha month which is considered even more auspicious of month. According to the Gregorian calendar, the Paush Purnima generally falls either in January or December. Details about Paush Purnima 2023 like date and time, pooja vidhi, vrat katha, etc can be found in this article.

Paush Purnima 2023 Overview


Paush Purnima 2023

Also known as

Shakambhari Purnima 2023


6th January 2023



Paush Purnima 2023 Date and Time

पौष पूर्णिमा विक्रम संवत के दसवें महीने अर्थात पौष के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि होती है। पौष पूर्णिमा देवी  शाकंभरी की याद में मनाया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन दानवों के खिलाफ देवों की करुणा पुकार को सुनकर आदि शक्ति जगदंबा शाकंभरी के रूप में शिवालिक हिमालय में प्रकट हुई थी। इसलिए इस दिन को शाकंभरी जयंती भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी पौष पूर्णिमा के दिन छेरता का पर्व मनाते हैं। जैन धर्म में पौष पूर्णिमा को लोग अलग तरीके से मनाते हैं, इस पर्व पर लोग पुष्यअभिषेक यात्रा निकालते हैं।

पूर्णिमा के दिन देवी शाकंभरी देवी जनकल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थी, माता शाकंभरी के कृपा भाव से बुके जीवो और सूखी हुई धरती को पुनर्जीवन मिला था। पूरे भारत में माता के अनेक मंदिर हैं परंतु सहारनपुर शक्तिपीठ की महिमा सबसे निराली है क्योंकि यह सबसे प्राचीन शक्तिपीठ है और माता का प्रमुख स्थान यही है।

In the year 2023, Paush Purnima is on January 6, 2023. Check out the timings for this Purnima below.

  • Paush Purnima Tithi Begins – 02:14 AM on January 06, 2023
  • Paush Purnima Tithi Ends – 04:37 AM on January 07, 2023

Significance of Paush Purnima 2023

Paush Purnima is a very sacred day for Hindus and it is believed that taking a bath in holy waters of Ganga river on this very day eradicate all the sins committed by the person and takes him to the path of salvation (Moksha). Despite the month Paush being cold, a large number of people takes a dip in Ganga on this day at the time of sunrise.

This day is also celebrated as Shakambari Jayanti in most parts of the country where Goddess Durga is worshipped in the form of Shakambari Devi (She who bears vegetables). People of Chhattisgarh celebrate the ‘Charta’ festival on this day.

Rituals on Paush Purnima 2023

The day of Paush Purnima begins with taking a bath in the waters of Ganga, Yamuna or other holy rivers at the time of sunrise. People take a bath and offer arghya to the rising Sun. After that, people offer prayers to Lord Shiva and Lord Vishnu.

Vrat katha is also recited by people and they seek blessings and forgiveness from God. Many people also observe a fast on this day (Satyanarayana vrat) and also prepare prasad to distribute among others. Giving alms to poor and hungry is also a famous practice followed on this day.

Food, clothes, money and other essential items are donated by people on Paush Purnima.

Paush Purnima 2023 Vrat Katha

People who observe day-long fast on the day of Paush Purnima worships Lord Vishnu and recites the vrat katha associated with this day. After the Vrat katha, people distribute prasad among other devotees listening to the katha and the pooja concluded. The story goes on as follows:

A Brahmin named Dhaneshwar and his wife, Roopvati who longed for a child met a Yogi who tells them to worship Goddess Chandi and seek Her blessings. They do as told and on the sixteenth day, Devi appears in Dhaneshwar’s dream, blessing him that he would have a child soon. However, She also tells him that the child will live only for sixteen years. This death might be prevented if both Dhaneshwar and Roopvati observe Vrat on the Purnima Tithi for 32 consecutive times.

Day comes and the couple is blessed by a boy who they name Devi Das. Once Devi Das attains the age of sixteen years, his parents sent him to kasha with his maternal uncle where he gets married under some circumstances. After certain time, Devi Das gets bitten by a snake out there somewhere and fell unconscious. Watching him lying on the ground, Goddess Parvati asked Lord Shiva to give him a new lease of life because Devi Das’ parents had observed the Purnima vrat for 32 consecutive times with total reverence and after that Lord Shiva blessed Devi Das with a long and happy life with his new bride.

पौष पूर्णिमा का महत्व

पौष पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा के व्रत, गंगा स्नान तथा दान पुण्य करने से करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने संपूर्ण रूप में आ जाता है और मान्यताओं के अनुसार संपूर्ण चंद्रमा का प्रभाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क पर पड़ता है। पौष पूर्णिमा के बाद से माघ का महीना शुरू हो जाता है, इसलिए इसी दिन से ही प्रयागराज में संगम तट पर माघ मेला आरंभ हो जाता है। माघ मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम पर आकर डुबकी लगाते हैं और यह मेला शिवरात्रि तक चलता रहता है।

पौष पूर्णिमा के दिन से ही कल्पवास की शुरुआत हो जाती है और पौष पूर्णिमा से एक-दो दिन पहले ही कल्पवासी कुंभ में आते हैं और साधना करते हैं। महाकुंभ का दूसरा स्नान पौष पूर्णिमा के दिन किया जाता है और माघ महीने की पूर्णिमा के दिन तक कल्पवास खत्म हो जाता है। यह सब कल्प वासी इसलिए करते हैं ताकि जीवन मृत्यु के बंधनों से उनको मुक्ति मिल जाए। पौष पूर्णिमा को चंद्र देव की पसंदीदा पूर्णिमा माना जाता है।

पौष पूर्णिमा व्रत कथाश्री सत्यनारायण कथा

पौष पूर्णिमा के दिन Sri Satyanarayan की कथा सुनने और पढ़ने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है। श्री सत्यनारायण कथा के अनुसार राजा चंद्रहास की नगरी ‘कातिका’ में एक धनेश्वर नाम का ब्राह्मण रहता था। उस ब्राह्मण की पत्नी का नाम रूपवती था। ब्राह्मण के पास धन दौलत की कोई कमी नहीं थी परंतु ब्राह्मण परिवार की कोई संतान नहीं थी। जिस कारण वह बहुत दुखी रहते थे। एक बार एक तपस्वी योगी उस नगरी में आया, वह योगी ब्राह्मण के घर को छोड़कर बाकी सारे घरों से भिक्षा मांगता था। कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, एक दिन ब्राह्मण ने देख लिया और वह योगी से पूछने लगा कि योगी उसके घर से भिक्षा क्यों नहीं लेता। इस पर योगी ने बताया कि प्रह्लाद के घर से भी लेना अति पतित कार्य है। यह बात सुनने के बाद धनेश्वर को बहुत दुख हुआ और उसने तपस्वी से समाधान पूछा। उस तपस्वी ने धनेश्वर को चंडी की आराधना करने के लिए कहा। अगले दिन धनेश्वर चंडी की उपासना तथा उपवास करने के लिए जंगल में चला गया।

16 दिन चंडी ने धनेश्वर को दर्शन दिए और कहा कि उसको पुत्र प्राप्ति होगी परंतु उसकी आयु 16 वर्ष की होगी और 16 वर्ष के पश्चात उसकी मृत्यु हो जाएगी। यदि ब्राह्मण दंपति 32 पूर्णमासियों का व्रत विधि पूर्वक करेंगे तो उनके पुत्र को दीर्घायु प्राप्त होगी। माता के अनुसार यदि वह लगातार 32 पूर्णमासी तक आटे के दिए बनाकर शिवजी का पूजन करेगा, तभी विधि पूरी होगी। इसके बाद ब्राह्मण ने पास ही एक आम का वृक्ष देखा और उस पर चढ़कर एक फल तोड़कर अपने घर आ गया। घर आने के बाद उसने पल अपनी पत्नी को दे दिया और उसकी पत्नी गर्भवती हो गई। देवी की कृपा से उनके घर एक पुत्र का जन्म हुआ। जिसका नाम उन्होंने देवीदास रखा। दुर्गा माता के आज्ञा अनुसार ब्राह्मण दंपति ने 32 पूर्णमासी का व्रत रखना प्रारंभ कर दिया। जब देवीदास 16 वर्ष  का होने वाला था, उस समय उसके माता-पिता ने उसको मामा के साथ काशी भेज दिया।

मामा और भांजा रात बिताने के लिए किसी ग्राम में ठहरे, उस दिन उस गांव में एक कन्या का विवाह होने वाला था। धोखे से देवीदास का विवाह उस कन्या से हो गया। विवाह के कुछ समय बाद कॉल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपति के व्रत के कारण देवीदास को कुछ नहीं हुआ और उसके ऊपर से संकट की घड़ी टल गई। तभी से कहा जाता है कि पूर्णिमा के दिन व्रत करने से हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिल जाती है।

पौष पूर्णिमा व्रत विधि

  • पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने से पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • संकल्प लेने के पश्चात पवित्र नदियां कुंड में स्नान किया जाता है और स्नान से थोड़ा पहले वरुण देव को प्रणाम किया जाता है।
  • इसके पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
  • भगवान मधुसूदन की पूजा भी की जाती है।
  • इसके बाद ब्राह्मण और गरीबों में दान दक्षिणा दी जाती है।
  • पूर्णिमा के दिन तिल, गुड, कंबल और ऊनी वस्त्र आदि का दान दिया जाता है।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना सबसे ज्यादा शुभ होता है इसलिए इस दिन कई लोग चावल का दान करते हैं क्योंकि चावल का संबंध चंद्रमा से होता है और चावल का दान करने से चंद्रमा की स्थिति कुंडली में मजबूत हो जाती है।
  • पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा भी सुनी जाती है।
  • इस दिन घर के मेन दरवाजे पर आम के पत्तों की तोरण बांधी जाती है और यह इसलिए किया जाता है क्योंकि ऐसा मानते हैं कि लक्ष्मी मां इससे प्रसन्न होती हैं।
  • इसके अतिरिक्त पौष पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है।
  • पूर्णिमा के दिन कई स्थानों पर मां दुर्गा की पूजा अर्चना भी की जाती है।
  • रात के समय चंद्रमा निकलने के बाद धूप दिया आदि से पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

 पौष पूर्णिमा के दिन ध्यान देने योग्य बातें

  • पौष पूर्णिमा के व्रत और पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है यदि इन बातों का ध्यान ना रखा जाए तो व्रत और पूजा विफल हो जाती हैं।पौष पूर्णिमा के दिन निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:-
  • पौष पूर्णिमा के दिन सारी पूजा विधि पूर्वक करनी चाहिए।
  • पौष पूर्णिमा के दिन यदि सफेद चीजों का दान किया जाए तो ज्यादा लाभ प्राप्त होता है।
  • पौष पूर्णिमा के व्रत के समय सत्यनारायण की कथा सुननी चाहिए क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद हीभोजन करना चाहिए।
  • मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति वासुदेव की मूर्ति को घी से नहीं लाता है और अपने शरीर पर सरसों के तेल या फिर सुगंधित वस्तुओंवाले जल से स्नान करता है  तथा विष्णु इंद्र और बृहस्पति के मंत्रों के साथ वासुदेव का पूजन करता है, उस व्यक्ति को अत्यंत सुख प्राप्त होता है।

Paush Purnima 2023 Date (पौष पूर्णिमा तिथि 2023)

पौष पूर्णिमा 6 जनवरी, 2023 को Friday के दिन होगी।

पौष पूर्णिमा तिथि 6 जनवरी, 2023 को 02:14 AM पर आरंभ होगी।

पौष पूर्णिमा तिथि 7 जनवरी, 2023 को 04:37 AM पर समाप्त होगी।


When is Paush Purnima 2023?

6th January 2023

When will Purnima tithi start?

6 जनवरी, 2023 को 02:14 AM

When will purnima tithi end?

7 जनवरी, 2023 को 04:37 AM

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