प्रॉपर्टी ट्रांसफर कैसे करें- प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के 4 तरीके (How to Transfer Property)

प्रॉपर्टी ट्रांसफर हमारे जीवन का सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण काम है।अगर सही समय पर हमारे बड़ों ने यह अपने बच्चों के नाम पर ना की तो इससे घर में लड़ाई झगड़े शुरू हो जाते हैं, जिससे घर का माहौल खराब होने लगता है। इसीलिए बड़े बुजुर्गों को चाहिए कि यह काम समय रहते कर दें ताकि भाई बहनों में प्रॉपर्टी को लेकर कोई तकरार ना रहे। यहां बहुत सारे तरीके हैं, जिससे आप अपनी प्रॉपर्टी किसी के नाम पर भी ट्रांसफर कर सकते हैं। उनमें से हम आपको कुछ तरीके बताएंगे। पर आप इनमें से सारे तरीके एक ही समय पर नहीं अपना सकते क्योंकि सबका अलग अलग महत्व है।

प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने केतरीके:-

  1. सेल डीड या बिक्रीनामा
  2. गिफ्ट डीड
  3. त्यागनामा
  4. विल

1.सेल डीड या बिक्रीनामा:

सेल डीड एक agreement होता है, जिसमें प्रॉपर्टी को दूसरे नाम पर ट्रांसफर करने का agreement होता है। यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। जिससे transfer deed भी कहा जाता है। इसमें वह सारी शर्तें लिखी होती है, जो प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के लिए जरूरी होती है। इसे सब रजिस्ट्रार के दफ्तर में रजिस्टर करवाना पड़ता है। रजिस्टर करवाने के बाद ही प्रॉपर्टी दूसरे बंदे के नाम पर ट्रांसफर होती है। जो शर्तें इसमें लिख दी जाती है, उसी के मुताबिक प्रॉपर्टी दूसरे मालिक के नाम पर ट्रांसफर होती है।

Agreement करने के rules and regulations:

Property खरीदते समय बहुत सारी formalities को पूरा करना होता है। इनमें सबसे जरूरी agreement होता है, जोकि एक लिखित कागज होता है, जिसमें दोनों sides की information होती है। इसमें प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वाले के नाम के अलावा दो गवाहों का भी नाम होता है, नाम के साथ साथ उनके आधार कार्ड भी लगते हैं।

इन सबके साथ साथ और भी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। जो एग्रीमेंट में लिखी होती हैं जैसे कि आप कौन सी प्रॉपर्टी बेच रहे हैं। कितनी प्रॉपर्टी बेच रहे हैं। यह प्रॉपर्टी कहां स्थित है। कौन सी दिशा में है। प्रॉपर्टी किसके नाम पर है। किसको बेच रहे हैं। आप सारी प्रॉपर्टी बेच रहे हैं या उसका कुछ हिस्सा बेच रहे हैं। उसकी कीमत कितनी है। क्या यह कीमत जो सरकार ने तय की है उससे ज्यादा तो नहीं है। इस प्रॉपर्टी को बेचने के लिए सब सहमत हैं जिनका नाम इसमें है। प्रॉपर्टी की कीमत कैसे दी जाएगी, यह सब कुछ इसमें लिखा जाएगा।

Stamp Duty:

हर राज्य की stamp duty अलग-अलग होती है। जैसे कि अगर प्लॉट खाली है तो यह उसी हिसाब से लगाई जाती है और अगर प्रॉपर्टी या घर बना हुआ है, तो उस पर निर्धारित की जाती है। कुछ शहरों में जैसे कि दिल्ली में महिलाओं के लिए यह 4% है और पुरुषों के नाम पर यह 6% है।

Profit and loss:

प्रॉपर्टी बेचने के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी है। जैसे कि इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि अगर आप सरकार को transfer tax pay करके प्रॉपर्टी  बेचते हैं तो आप इससे आई धनराशि को पूरी तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें  नुकसान यह है कि इसे खरीदने के लिए ट्रांसफर फीस देनी पड़ती है जो कि बहुत ज्यादा होती है। अलग-अलग शहरों की ट्रांसफर की अलग-अलग होती है और अगर आप की प्रॉपर्टी की कीमत खरीदने समय की और बेचने समय की सरकार द्वारा निर्धारित से ज्यादा हो जाती है तो आपको टैक्स पे करना पड़ता है। जोकि 10% से30% तब का होता है।

2. गिफ्ट डीड:

गिफ्ट डीड एक गिफ्ट के रूप में दी जाने वाली प्रॉपर्टी होती है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे जानने वाले व्यक्ति को अपनी प्रॉपर्टी दे देता है तो उसे गिफ्ट डीड कहते हैं। ऐसा वह उसके प्रति आदर, प्यार और दया की भावना से ही करता है। अगर वह अपनी इस इच्छा के अनुसार प्रॉपर्टी उसको गिफ्ट में दे देता है तो उसके बदले में वह उससे कुछ भी नहीं ले सकता। क्योंकि अगर वह ऐसा करेगा तो गिफ्ट की भावना तो खत्म ही हो जाएगी।

Rules for gift deed:

Sale deed के जैसे gift deed भी एक लिखित एग्रीमेंट होता है जिसमें साफ-साफ लिखा होता है कि प्रॉपर्टी देने वाला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को गिफ्ट के तौर पर अपनी प्रॉपर्टी दे रहा है और यह वह सिर्फ उसके प्रति प्रेम की भावना से ही कर रहा है। जिसके बदले में वह उस व्यक्ति से कुछ भी नहीं ले रहा। जैसे कि यह भी लिखित होती है तो इसमें भी दो गवाह होते हैं और उनके आधार कार्ड भी लगते हैं।

Stamp Duty:

इसमें भी आपको stamp duty देनी पड़ती है, जितने की सेल डीड में देनी पड़ती है। दिल्ली में यह औरतों के लिए 4% है और पुरुषों के लिए 6% निर्धारित की गई है।

Profit and loss:

Sale deed की तरह इसके भी अपने फायदे और नुकसान हैं। इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपको कोई भी tax नहीं देना पड़ता क्योंकि प्रॉपर्टी लेने वाला आपको कुछ भी नहीं दे रहा और आप इनकम टैक्स के सवालों से बच जाते हैं। और इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जो बंदा अपनी प्रॉपर्टी दूसरे के नाम से गिफ्ट के तौर पर दे रहा है, वह जब भी चाहे इस प्रॉपर्टी को कोर्ट में केस करके वापस ले सकता है ।

3.त्यागनामा:

त्याग नामा वह होता है जिसमें प्रॉपर्टी के मालिक एक से ज्यादा हो तो उसमें से एक मालिक अपना हिस्सा छोड़कर दूसरे के नाम पर अपनी मर्जी के अनुसार कर सकता है। जैसे कि एक प्रॉपर्टी तीन भाइयों के नाम पर है उनमें से एक भाई अपनी इच्छा के अनुसार अपना हिस्सा दूसरे दोनों भाइयों में बराबर बराबर बांट दें। वह त्यागना में होता है।

Rules for त्यागनामा:

यह deed भी लिखित होती है और रजिस्टर्ड होती है। इसमें एक भाई अपना हिस्सा बिना कुछ लिए छोड़ सकता है। ऐसा वह सिर्फ  अपने ब्लड रिलेशन में ही कर सकता है। उसे अपना पूरा हिस्सा ही छोड़ना होता है। यह नहीं कि आप आधा यह थोड़ा सा ही हिस्सा छोड़ो। पूरे का पूरा हिस्सा छोड़ना होता है।

Stamp Duty:

इसमें भी stamp ड्यूटी अलग-अलग राज्यों के अनुसार होती है। दिल्ली में यह 4000 तक है। इसी प्रकार अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग स्टैंप ड्यूटी है। उसी के अनुसार आपको यह देनी पड़ती है।

Profit and loss of त्याग नामा:

इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप थोड़ी सी फीस pay करके प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सकते हैं, इससे आप ट्रांसफर फीस से बच जाते हैं।और इसका नुकसान यह है कि जो व्यक्ति अपनी मर्जी के अनुसार अपना हिस्सा दे रहा है; वह यह डील कैंसिल करके अपना किस्सा कोर्ट में केस करके वापस भी ले सकता है और वह पूरा का पूरा हिस्सा वापस ले सकता है।

4. विल

Indian succession act 1952 के अनुसार विल का अर्थ यह होता है कि जब कोई व्यक्ति अपने जीते जी अपनी सारी प्रॉपर्टी का उत्तराधिकारी किसी दूसरे व्यक्ति को बना देता है उसे विल कहते हैं। उसके मरने के बाद यह प्रॉपर्टी विल के अनुसार उसी व्यक्ति के नाम हो जाती है।Will करने वाले व्यक्ति को testator कहते हैं। जिसे विल के द्वारा प्रॉपर्टी मिलती है उसे beneficiary कहते हैं।

विल दो प्रकार की होती है— privileged bill and unprivileged bill

Conditions for writing will: –

विल लिखने के लिए कुछ शर्तों को ध्यान में रखना पड़ता है जोकि Act में साफ तौर पर स्पष्ट की गई है जो के इस प्रकार हैं: –

  1. जब will लिखी जा रही हो तो ट्रांसफर करने वाला व्यक्ति 18 साल या उससे ऊपर की आयु का होना चाहिए।
  2. will लिखती रूप में होनी चाहिए।
  3. इसकी 2 कापियां बननी चाहिए। एकरजिस्ट्रार के पास होनी चाहिए और दूसरी आपको मिले।
  4. विल में दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  5. विल में लिखी जाने वाली प्रॉपर्टी या तो आप ने खरीदी हो या आपको कहीं से मिली हुई होनी चाहिए।

Stamp Duty: –

बाकी डीड के जैसे इसमें भी थोड़ी सिस्टम ड्यूटी लगती है। यह भी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है जैसे कि दिल्ली में यह तीन को हजार के करीब है।

Profit and loss: –

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आप विल लिखवा लेते हो तो आप की प्रॉपर्टी सही हाथों में चली जाती है। जिसके कारण आपके जाने के बाद आप की प्रॉपर्टी में कोई झगड़ा नहीं रहता। विल करवाने का कोई भी नुकसान नहीं है। अपनी प्रॉपर्टी के सही इस्तेमाल के लिए हम सब को विल करवा कर रखनी चाहिए।

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